बढ़ती आबादी की चुनौतियां
जब भी देश में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर विमर्श प्रारम्भ होता है ,तो कुछ लोगों की प्रतिक्रिया इस प्रकार होती है जैसे उनका हकछीना जा रहा हो। लोग इतने इनटॉलरेंट हो जाते है , मानो उनके निजी जीवन पर हमले किये जा रहे हो ।लेकिन जनसंख्या वृद्धि की समस्या इन तर्कों से ऊपर है । जनसंख्या विस्फोट से संसाधनों की अपर्याप्तता के कारण उतपन्न हुई समस्याओं का असर सब पर पड़ेगा । जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर देश में बड़ी बड़ी योजनाएं तो बनी ,लेकिन किसी पर कायदे से अमल नहीं हुआ । इसका नतीजा यह रहा कि जनसंख्या कम होने या थमने के बजाय बढ़ती ही चली गयी। जनसंख्या नियंत्रण के लोए भारत में कोई ठोस नीति नहीं बनी । केवल 'हम दो हमारे दो ' जैसे नारों से लेकर परिवार नियोजन के सरकारी विज्ञापन बनते रहे , लेकिन आबादी बढ़ती रही ।
जनसंख्या वृद्धि का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ रहा है , ग्रामीण आबादी के रोजगार की तलाश में लगातार शहरों की ओर पलायन करने। से , शहरी लोगो की जिंदगी भी मुश्किल बनती जा रही है । देश में लोग गाँव छोड़ कर शहरों की ओर पलायन को इसलिए मजबूर हो रहे है कि सरकार गाँव में रोजगार , अच्छी एजुकेशन और हेल्थ जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नही करा पायीं है । यूनाइटेड नेशन के नयी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक दुनिया की 68 फीसद आबादी शहरों में रहने लगेगी । मौजूदा दौर में लगभग 55 फीसद जनसंख्या शहरों में निवास करती है । देश की आबादी इसी तरह विस्फोटस्क रूप से बढ़ती रहेगी तो , संकट और भी गंभीर रूप धारण करते जायेंगे । दिल्ली का ही उदाहरण ले लें । दिल्ली में अभी भी 2001 का मास्टर प्लान लागू है । जबकि शहर में 2021 का मास्टर प्लान लागू हो जाना चाहिए था । इस मास्टर प्लान के अनुसार 2021 तक दिल्ली में हर आदमी को रहने के लिए चालीस वर्ग मीटर जगह की आवश्यक्ता होगी । इस मास्टर प्लान के मुताबिक दिल्ली को 920 वर्ग किलोमीटर की जगह चाहिए । लेकिन दिल्ली की वर्तमान आबादीको रहने के लिए 1107 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए । ऐसे में यह सोच कर ही अचंभित लगता है कि दस वर्ष बाद जब दिल्ली की आबादी तीन करोड़ के पार होगी , तब क्या होगा ? संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2024 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जायेगा ऐसे में यह गंभीर सवाल है कि क्या जनसंख्या के बोझ से जूझ रहे भारत के पास लोगों को अच्छा जीवन और रोजगार देने के संसाधन होंगे ?
देश में 10 से 35 वर्ष के मध्य आयुवर्ग के युवाओं की आबादी लगभग 60 करोड़ है । इस युवा आबादी को सही दिशा और पर्याप्त संसाधन कराएं जाएँ तो भारत दुनिया का सिरमौर बन सकता है । लेकिन सच्चाई यह है कि देश में केवल अनपढ़ युवाओं की आबादी लगभग 30 करोड़ है । देश में 10 करोड़ युवा ऐसे है जो शिक्षित होने के बावजूद किसी कौशल में दक्ष नहीं है । वर्ष 2030 तक दस करोड़ नयी नौकरियों की आवश्यक्ता होगी । इसके लिए इतने दक्ष युवा तैयार करना भी एक चुनौती होगी । जनसंख्या विस्फोट के प्रभाव से बचने के लिए जरुरी है कि लोगो के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और नीतियों का निर्माण किया जाए , जिससे लोग बिमारी और बेरोजगारी जैसी विपरीत परिस्थितियों में दूसरों पर निर्भर न रहें ।
आज जनसंख्या वृद्धि देश में ज्यादातर समस्याओं का बड़ा कारण बनती जा रही है । गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं , अपराध , स्वच्छ पानी की कमी जैसी समस्याओं का बड़ा कारण बढ़ती आबादी भी है । देश के पास दुनिया के कुल जमींन का 2.4 फीसद हिस्सा है और इसमें दुनिया की 18 फीसद आबादी निवास करती है । देश में जमींन के कुल 60 फीसद हिस्से पर खेती होने के बावजूद 20 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार है । देश की आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या भी भविष्य में देश की बड़ी समस्याओं में से एक होगी , क्योंकि देश में वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है , लेकिन जनसँख्या वृद्धि के हिसाब से सड़कों का निर्माण पर्याप्त नहीं हो पा रहा है । इसी कारण देश की बढ़ती आबादी का बोझ सड़कों पर आसानी से देखा जा सकता है । वर्ष 1950 में भारत की जनसंख्या दर 37 करोड़ थी । वर्तमान तक यह आंकड़ 125 करोड़ के आसपास पहुच गया है । इस वृद्धि से अनुमानतः वर्ष 2050 तक चालीस करोड़ लोग और बढ़ जाएंगे । जनसंख्या वृद्धि के लिहाज से देश की राजधानी दिल्ली ही सबसे अग्रणी है । एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन जायेगा ।
देश में जब भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नीति निर्माण की चर्चा होती है तो कुछ बुद्धजीवी चीन की जनसँख्या वृद्धि को प्रोत्साहन देने की नीति का उदाहरण देकर, भारत की जनसंख्या वृद्धि को उचित ठहराते है । इस परिप्रेक्ष में जनसंख्या नीति को लेकर चीन से तुलना उचित नहीं है। चीन ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2060 तक साठ वर्ष से ऊपर के प्रति दो बुजुर्गों पर तीन युवा होंगे । ऐसे में संकट यह होगा की युवा नौकरी करेंगे या बुजुर्गों की सेवा । जबकि भारत एक युवा देश है जिसकी वर्तमान युवा आबादी 60 फीसद से अधिक है । ऐसे में भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए भारत के संदर्भ में चीन की जनसंख्या नीति अनुपयुक्त है । चीन ने अपनी बढ़ती हुई आबादी को संसाधन मानकर , लोगो को इकॉनमी के विकास में भगीदार बनाया । इसलिए चीन आज दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है ।
एक अनुमान के मुताबिक देश में कामकाजी लोगों की संख्या अगले तीन दशकों तक 30 फीसद की दर से बढ़ेगी । इसी दौरान चीन में कामकाजी लोगों की संख्या बीस फीसद की दर से कम हो जायेगी । विडंबना यह है कि जनसंख्या नियंत्रण , जो राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ मुद्दा है , उस पर नियंत्रण के लिए कभी किसी दल या संगठन ने आवाज नही उठाई । देश की तमाम राजनितिक पार्टियां रोटी कपड़ा मकान की बात तो करते है । किंतु जनसंख्या नियंत्रण पर क़ानून बनाने की बात कोई नही करता है ।
भारत और चीन दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश है । चीन की वर्तमान जनसंख्या 141 करोड़ है और भारत की 125 करोड़ के लगभग है । संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अगले छ: वर्षों में भारत की जनसंख्या चीन से आगे निकल जाएगी । देश की जनसंख्या अनियंत्रित रूप से इसी तरह बढ़ती रही तो , आने वाले समय में शहरों में गाडी चलाने के लिए सड़क, पिने के लिए पानी , और साँस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिलनी मुश्किल हो जायेगी । जापान की राजधानी टोक्यो सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है । टोक्यो की जनसंख्या 3 करोड़ 70 लाख है । वर्तमान में राजधानी दिल्ली की जनसंख्या 2 करोड़ 90 लाख है । लेकिन एक अनुमान के मुताबिक दस साल में ही दिल्ली की जनसंख्या टोक्यो को पीछे छोड़ देगी । ऐसा नही है कि केवल विस्फोट के रूप से जनसंख्या वृद्धि केवल दिल्ली में ही हो रही है , बल्कि पूरे देश की हालत ऐसी ही है ।
भारत और चीन दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश है । चीन की वर्तमान जनसंख्या 141 करोड़ है और भारत की 125 करोड़ के लगभग है । संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अगले छ: वर्षों में भारत की जनसंख्या चीन से आगे निकल जाएगी । देश की जनसंख्या अनियंत्रित रूप से इसी तरह बढ़ती रही तो , आने वाले समय में शहरों में गाडी चलाने के लिए सड़क, पिने के लिए पानी , और साँस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिलनी मुश्किल हो जायेगी । जापान की राजधानी टोक्यो सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है । टोक्यो की जनसंख्या 3 करोड़ 70 लाख है । वर्तमान में राजधानी दिल्ली की जनसंख्या 2 करोड़ 90 लाख है । लेकिन एक अनुमान के मुताबिक दस साल में ही दिल्ली की जनसंख्या टोक्यो को पीछे छोड़ देगी । ऐसा नही है कि केवल विस्फोट के रूप से जनसंख्या वृद्धि केवल दिल्ली में ही हो रही है , बल्कि पूरे देश की हालत ऐसी ही है ।
जनसंख्या वृद्धि का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ रहा है , ग्रामीण आबादी के रोजगार की तलाश में लगातार शहरों की ओर पलायन करने। से , शहरी लोगो की जिंदगी भी मुश्किल बनती जा रही है । देश में लोग गाँव छोड़ कर शहरों की ओर पलायन को इसलिए मजबूर हो रहे है कि सरकार गाँव में रोजगार , अच्छी एजुकेशन और हेल्थ जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नही करा पायीं है । यूनाइटेड नेशन के नयी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक दुनिया की 68 फीसद आबादी शहरों में रहने लगेगी । मौजूदा दौर में लगभग 55 फीसद जनसंख्या शहरों में निवास करती है । देश की आबादी इसी तरह विस्फोटस्क रूप से बढ़ती रहेगी तो , संकट और भी गंभीर रूप धारण करते जायेंगे । दिल्ली का ही उदाहरण ले लें । दिल्ली में अभी भी 2001 का मास्टर प्लान लागू है । जबकि शहर में 2021 का मास्टर प्लान लागू हो जाना चाहिए था । इस मास्टर प्लान के अनुसार 2021 तक दिल्ली में हर आदमी को रहने के लिए चालीस वर्ग मीटर जगह की आवश्यक्ता होगी । इस मास्टर प्लान के मुताबिक दिल्ली को 920 वर्ग किलोमीटर की जगह चाहिए । लेकिन दिल्ली की वर्तमान आबादीको रहने के लिए 1107 वर्ग किलोमीटर जगह चाहिए । ऐसे में यह सोच कर ही अचंभित लगता है कि दस वर्ष बाद जब दिल्ली की आबादी तीन करोड़ के पार होगी , तब क्या होगा ? संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2024 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जायेगा ऐसे में यह गंभीर सवाल है कि क्या जनसंख्या के बोझ से जूझ रहे भारत के पास लोगों को अच्छा जीवन और रोजगार देने के संसाधन होंगे ?
देश में 10 से 35 वर्ष के मध्य आयुवर्ग के युवाओं की आबादी लगभग 60 करोड़ है । इस युवा आबादी को सही दिशा और पर्याप्त संसाधन कराएं जाएँ तो भारत दुनिया का सिरमौर बन सकता है । लेकिन सच्चाई यह है कि देश में केवल अनपढ़ युवाओं की आबादी लगभग 30 करोड़ है । देश में 10 करोड़ युवा ऐसे है जो शिक्षित होने के बावजूद किसी कौशल में दक्ष नहीं है । वर्ष 2030 तक दस करोड़ नयी नौकरियों की आवश्यक्ता होगी । इसके लिए इतने दक्ष युवा तैयार करना भी एक चुनौती होगी । जनसंख्या विस्फोट के प्रभाव से बचने के लिए जरुरी है कि लोगो के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और नीतियों का निर्माण किया जाए , जिससे लोग बिमारी और बेरोजगारी जैसी विपरीत परिस्थितियों में दूसरों पर निर्भर न रहें ।
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